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विडियो अनकट: निगम के विशेष सम्मेलन का पूरा कवरेज देखिए, जलील कर अधिकारी को बैठक से बाहर किया

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देवास। बीजेपी पार्षद दल द्वारा बुलाए गए नगर निगम के विशेष सम्मलेन में जम कर हंगामा हुआ। रुके हुए विकास के लिए नेताओं ने अधिकारीयों को दोषी बताया। साथ ही महापौर ने सारा ठीकरा कांग्रेस की सरकार और निगम के अधिकारीयों के माथे फोड़ दिया।

पिछले एक वर्ष से नगर निगम में विकास कार्य लगभग बंद पड़े हुए है और अधिकारी-कर्मचारी अपनी मनमानी कर रहे है। इसी मुद्दे को लेकर भाजपा पार्षद दल ने विशेष सम्मलेन बुलाने की मांग की थी, उनकी इस मांग पर मंगलवार को नगर निगम में परिषद का विशेष सम्मलेन आहूत किया गया। चूंकि वर्तमान परिषद का कार्यकाल 31 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, इसीलिए यह माना जा रहा है कि यह परिषद की अंतिम बैठक थी। इस बैठक में पार्षद से लेकर अध्यक्ष व महापौर ने अधिकारियों कर्मचारियों पर निशाना साधा और यह बैठक  भी हंगामेदार रही।

परिषद की बैठक प्रारंभ होते ही नेता सत्तापक्ष मनीष सेन ने शहर के 45 वार्डों में बंद पड़े विकास कार्यों का मुद्दा उठाते हुए आयुक्त से पूछा कि वार्डों के विकास अवरुद्ध क्यों हो रहे है और कार्यों के टेंडर कब होंगे। इस पर आयुक्त ने कहा कि टेंडर हो चुके है और उनके वर्कआर्डर जल्द जारी होंगे।

काम नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव

विशेष सम्मलेन में निगम आयुक्त संजना जैन समेत कार्यपालन यंत्री पियूष भार्गव और सीवरेज परियोजना देख रहे जगदीश वर्मा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। निगम आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव का नेता प्रतिपक्ष विक्रम पटेल ने विरोध किया। निगम आयुक्त संजना जैन, कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव व जगदीश वर्मा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। यह प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा और वहीं से इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। जबकि निगमायुक्त की सफाई है कि मेरे माध्यम से दो अधिकारियों के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया। कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव को लेकर पार्षदों ने कड़ी आपत्ति जताई। उन पर भ्रष्टाचार और शहर का विकास प्रभावित करने का आरोप लगाया। पार्षदों ने कहा कि इनका पूर्व का अन्य शहरों का कार्यकाल भी बेहतर नहीं रहा है।

हनीफ शैख़ को बैठक से बाहर करवाया

मनीष सेन ने खड़े होकर बोला कि पिछली परिषद की बैठक में निर्णय हुआ था कि हनीफ शैख़ को स्वास्थ्य अधिकारी के पद से हटाया जाए, किंतु आज तक नहीं हटाया गया और आज ये किस हैसियत से परिषद की बैठक में शामिल हुए है। सेन के यह कहते ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के पार्षदों ने हंगामा शुरु कर दिया। इसी दौरान पार्षद अर्जुन चौधरी, संजय दायमा, राजेश यादव, विनय सांगते सहित कई पार्षदों ने हनीफ शैख़ को बैठक से बाहर करने की मांग की। इस पर निगम अध्यक्ष अंसार अहमद ने कहा कि जब पिछली परिषद की बैठक में निर्णय हो गया था तो आयुक्त ने हनीफ शैख़ को क्यों नहीं हटाया। उन्होंने यहां तक कहा कि आयुक्त परिषद की अवहेलना कर रही है। इसके बाद अध्यक्ष ने हनीफ शैख़ को निर्देश दिये कि वे बैठक से बाहर चले जाए और उन्हें जलील होकर बाहर निकलना पड़ा।

अमृत योजना के काम पूरे नहीं हुए

अमृत योजना का मुद्दा उठा और पार्षदों का कहना था कि समयावधि बीत जाने के बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है, तब निगम आयुक्त के कहने पर इंजीनियर बैग ने सफाई देते हुए कहा कि 12 माह की अवधि में काम हो जाना था, किंतु बीच में विधानससभा की आचार संहिता लग गई, इसीलिए देरी हो रही है। तब पार्षद धर्मेंद्र पाचुनकर ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आचार संहिता लगने के पहले ही अमृत योजना के वर्क आर्डर जारी हो चुके थे, तो काम रुकने का सवाल ही नहीं उठा। इस पर बैग जवाब नहीं दे पाए। इस दौरान संजय दायमा ने कहा कि मेरे वार्ड में तो पाइप लाइन डल चुकी है, किंतु पानी सप्लाय शुरु नहीं हुआ है, इस पर उपयंत्री जगदीश वर्मा ने गोलमाल जवाब देते हुए कहा कि नेशनल हाईवे से रोड क्रास करने की अनुमति लेना है, किंतु उन्होंने ने इसके लिए अभी तक नेशनल हाईवे से पत्र व्यवहार नहीं किया। इस पर निगम आयुक्त ने वर्मा को हिदायत दी कि आज ही बैठक समाप्त होते ही अनुमति के लिए पत्र मेरे लाए और मेरे हस्ताक्षर से पत्र रवाना करें।

सभी काम रोके हैं कार्यपालन यंत्री पियूष भार्गव, सौ करोड़ की जाँच में फंसे हैं

बैठक में कार्यपालन यंत्री पियूष भार्गव को भी करने की हुई मांग हुई। विकास कार्य में अवरोध पैदा करने वाले कार्यपालन यंत्री पीयुष भार्गव पर नेता सत्तापक्ष मनीष सेन, नेता प्रतिपक्ष विक्रम पटेल सहित सभी पार्षदों ने जमकर भड़ास निकाली। कांग्रेसी पार्षद अकील हुसैन ने कहा कि पीयुष भार्गव की वजह से विकास कार्य नहीं हो रहे है। इनके खिलाफ 100 करोड़ की जांच चल रही है और इन्होंने सैकड़ों फाइल रोककर रखी हुई है। इन्हें लोनिवि से हटाया जाए और बैठक से भी बाहर किया जाए। इस दौरान महापौर ने भार्गव का पक्ष लेते हुए कहा कि सभी अधिकारियों को बाहर कर देंगे, तो काम कैसे चलेगा। पार्षद इरफान अली ने कहा कि कार्यपालन यंत्री  भार्गव 12 प्रतिशत पी.सी. मांगते है। इस दौरान भार्गव बगले झांकते रहे। उन्हें निगम आयुक्त ने हिदायत दी कि वे मुख्यलय पर ही निवास करें। वे वर्तमान में उज्जैन से आना-जाना करते है।

कर्मचारी बैठक का बहिष्कार करने वाले थे

निगम अध्यक्ष अंसार अहमद ने जब पीयुष भार्गव को बाहर निकलने के आदेश दे दिये, तब इंजीनियर आसिम शेख व जितेंद्र सिसौदिया अधिकारियों-कर्मचारियों को बैठक का बहिष्कार करने का संकेत देने लगे। इन दोनों अधिकारियों के संकेत को नेता सत्तापक्ष सेन व विनय सांगते देख लिया। दोनों अधिकारियों को इन पार्षदों ने हिदायत देते हुए कहा कि अध्यक्ष की अनुमति के बगैर न तो तुम अंदर आ सेकते हो और ना बाहर जा सकते हो, इसीलिए ज्यादा नेतागिरी मत करो और यदि बाहर जाना हो तो चले जाओ, फिर तुम्हारे खिलाफ कार्यवाही होगी। यह सुनते ही आसिम शेख और जितेंद्र सिसौदिया चुपचाप अपनी कुर्सी पर बैठ गए।

आयुक्त को फ़ैल करना चाहते हैं अधिकारी- बांगर

वरिष्ठ पार्षद दिलीप बांगर ने कहा कि पिछले एक वर्ष से शहर में विकास कार्य अवरुद्ध पड़े हुए है और अब नया फरमान जारी हो गया है कि ठेकेदार को एनओसी लेना आवश्यक हो गया है। मैं अपने ही वार्ड का उदाहरण देना चाहता हूं कि मुझे मेरे वार्ड में सडक़ निर्माण करने वाले ठेकेदार ने सिर्फ इसीलिए काम शुरु नहीं किया कि उसे अन्य विभागों की एनओसी नहीं मिली है। मैं जानना चाहता हूं कि नगर निगम की एक ही बिल्डिंग में अन्य विभागों से एनओसी लेने में कितने दिन लग जाते है?। मुझे स्वयं अपने वार्ड के लिए एनओसी लेने में 25 दिन लग गए है, तो दूसरे पार्षदों की स्थिति  या होगी। पार्षद बांगर ने कहा कि मुझे लगता है मैडम के आने के बाद स्थिति बदतर हो गई है, शायद निचले अधिकारी उन्हें फेल करना चाहते है। बांगर ने यह भी कहा कि अधिकारी काम नहीं कर रहे है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष 14 करोड़ 50 लाख की राजस्व वसूली हुई थी और इस वर्ष मात्र 7 करोड़ की वसूली हुई है। इसके बाद आयुक्त ने अधीनस्थ अमले को निर्देशित किया कि विभागीय अधिकारी मात्र एक दिन में ही एनओसी जारी कर दे और यदि मूल अधिकारी नहीं हो तब अधीनस्थ अधिकारी तीन दिन में एनओसी जारी करें।

परख बेसन इण्डस्ट्रीज में अवैध निर्माण का मुद्दा उठा

नेता सत्तापक्ष मनीष सेन व कांग्रेसी नेता अकील हुसैन ने परख बेसन इण्डस्ट्रीज का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछली परिषद की बैठक में समिति बनाई गई थी, जिसका अध्यक्ष इंजीनियर आसिम शेख को बनाया था, किंतु उन्होंने इण्डस्ट्रीज जाकर जांच करने सं इंकार कर दिया। आसिम शेख का कहना था कि उन्हें परिषद के सचिव ने सीधे पत्र दे दिया था। जबकि आयुक्त के आदेश नहीं मिले थे, इसीलिए मैं नहीं गया। इस विषय पर काफी देर तक बहस चलने के बाद निगम आयुक्त को बोलना पड़ा कि मैं स्वयं पार्षदों के साथ इण्डस्ट्रीज जाउंगा और अवैध निर्माण की जांच करूंगी।

महिला पार्षद बोलीं- हमारे साथ हुआ अन्याय

परिषद की बैठक में महिला पार्षद शांता ठाकुर व वंदना पांडेय ने महापौर सुभाषशर्मा को आड़े हाथों लिया और कहा कि महापौरजी हमारे साथ आपने पूरे पांच साल तक भेद भाव व अन्याय किया है। वंदना पांडेय ने कहा कि मेरे वार्ड में आज तक रामचंद्र नगर व ढांचा भवनकी सडक़ नहीं बनी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चहेते ठेकेदारों से विधायक निधि के काम करवाए गए है।

इन पार्षदों ने भी निकाली भड़ास

कांग्रेसी पार्षद राजेश डांगी ने जमकर भड़ास निकाली और उन्होंने ने तो सीधे-सीधे महापौर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। पार्षद बाबू यादव ने कहा कि आयुक्त ने एक माह पूर्व कहा था कि 8 दिन में वार्डों में एलईडी लग जाएगी, किंतु आज तक नहीं लगी। पार्षद ममता शर्मा ने कहा कि 8 माह पूर्व मेरे वार्ड की 4 सडक़ों के लिए टेंडर हो चुके है और कार्यादेश भी जारी हो चुके है, किंतु अभी तक सडक़ निर्माण का कार्य शुरु नहीं हुआ है, किंतु उनकी इस बात का कोई भी अधिकारी जवाब नहीं दे सका।

महापौर ने अधिकारियों पर निकाली भड़ास

पिछले 5 वर्ष में जितनी भी परिषद की बैठक हुई, उनमें पार्षदों द्वारा अधिकारियों को घेरा जाता था और महापौर सुभाष शर्मा संस्था प्रमुख होने के नाते अधिकारियों का बचाव करते नजर आते थे, किंतु परिषद की अंतिम बैठक में महापौर ने भी बैठक में मे अधिकारियों पर जमकर भड़ास निकाली और अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आयुक्त मैडम के आने के बाद श्वेत पत्र जारी हुआ था, उससे हम सबको परेशानी झेलना पड़ी। श्वेत पत्र जारी कर नगर निगम ने बताया था कि 169 करोड़ की देनदारियां बाकी है, इसके बाद ठेकेदार डर गए और उन्होंने काम लेने में रूचि नहीं दिखाई। राजस्व विभाग के अधिकारियों को वसूली में कोई रूचि नहीं है। कई बार पार्षदों ने संस्था की आय बढ़ाने के सुझाव दिये, किंतु अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। महापौर ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और कई बार निगम के अधिकारियों से कहा कि आपकी लापरवाहियों के कारण संस्था का अहित हो रहा है। हम तो आज है, कल चले जाएंगे, आप ही इस संस्था के भविष्य हो। अब भी सुधर जाओ और ईमानदारी से काम करो।

महापौर का अनकट भाषण विडियो में देखें 

आयुक्त मैडम आपके कार्यकाल की कोई उपलब्धि हो तो बताओ- विनय सांगते 

पार्षद विनय सांगते ने आयुक्त को चुनौती देते हुए कहा कि मैडम आपके कार्यकाल में कोई उपलधि हो तो परिषद में बता दो। इस पर आयुक्त ने कहा कि मैं अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं कर सकती हूं। सांगते ने अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को चेतावनी दी और कहा कि आप गलतफहमी में हो, हम अभी 15 दिन पार्षद के पद पर रहेंगे, तब तक मर्यादा में रहेंगे, उसके बाद भी हमें निपटना आता है।

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