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वीडियो: 10 दिन में कर्जमाफी करने वाली सरकार के 11 माह के कार्यकाल में 122 किसानों ने कर्ज से परेशान होकर की आत्महत्या

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  • प्रदेश सरकार के एक साल के कार्यकाल की विफलता पर सांसद महेंद्रसिंह सोलंकी जी की पत्रकार वार्ता
  • कमलनाथ सरकार का विफलताओं भरा एक वर्ष, सरकार ने नहीं किये वादे पूरे

देवास । भाजपा प्रदेश संगठन के निर्देशानुसार प्रदेश की कांग्रेस सरकार के एक साल की विफलताओं को लेकर सांसद श्री महेंद्रसिंह सोलंकी ने भाजपा जिला कार्यालय पर पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया । पत्रकार वार्ता में सांसद जी द्वारा पत्रकार बंधुओ से कमलनाथ सरकार के एक साल के कार्यकाल की विफलता पर बिंदुवार चर्चा की गयी, इस अवसर पर सांसद जी के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष श्री नंदकिशोर पाटीदार, कार्यालय प्रभारी श्री रेवंत राजोले व जिला प्रवक्ता शंभु अग्रवाल भी मौजूद थे ।

पत्रकार वार्ता के मुख्य बिंदु :-
– मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर उसकी उपलब्धि यह है कि उसने वचन पत्र में जो कुछ भी कहा उसमें से कुछ भी नहीं किया।
-सरकार ने यदि कुछ किया तो तीन ही काम किए-पहला धोखा, दूसरा भ्रष्टाचार और तीसरा कानून व्यवस्था का बंटाढार।
-कर्जमाफी के बावजूद मध्यप्रदेश में किसान आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे हैं। किसानों को फसलें खराब होने पर मुआवजा नहीं मिलता। किसानों को हर दिन कुर्की की धमकियां मिल रही हैं। बैंकों से कर्ज वसूली के नोटिस मिल रहे हैं। कमलनाथ सरकार की झूठी कर्जमाफी के कारण किसान आत्महत्या को मजबूर हुआ है।
– 10 दिन में कर्जमाफी करने वाली सरकार के 11 माह में 122 से अधिक किसानों ने कर्ज वसूली से परेशान होकर आत्महत्या की।
– पर्याप्त यूरिया का स्टॉक होने के बावजूद प्रदेश सरकार ने किसानों के साथ छल करते हुए कालाबाजारी को बढावा दिया। हजारों किसान यूरिया के लिए बेहाल होकर सरकार को कोस रहे है।
– प्रदेश के 32 जिलों में अतिवर्षा से किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। सोयाबीन, मक्का, मूंग, उड़द, कपास, केला, संतरा व सब्जियों की खेती में पड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हुई। लेकिन प्रदेश सरकार मुआवजा राशि वितरित करने में कोताही बरती। कई किसानों को आज तक मुआवजा राशि नहीं मिली।
– कमलनाथ सरकार ने कर्जमाफी का वचन दिया था लेकिन किसान आज भी कर्जमाफी की प्रतिक्षा में है और इसी कारण किसान बीमा प्रीमियम जमा नहीं कर पाया। सरकार की इस विसंगति के कारण किसान फसल बीमा से वंचित हुआ है।
– कांग्रेस ने अपने वचन पत्र में जीरो प्रतिशत ब्याज योजना का वास्तविक लाभ देने का वचन दिया था। खरीफ ऋण की डयू-डेट 31 दिसम्बर तय करेगें का वादा किया था, लेकिन ऐसा अभी तक नहीं किया।
– कांग्रेस ने वचन-पत्र में किसानों को फसलों पर बोनस देने का वादा किया था, लेकिन आज तक कांग्रेस इस वचन को नहीं निभा पाई।
– भाजपा सरकार के समय किसानों को खेती के लिए पर्याप्त बिजली मिलती थी। कांग्रेस ने अपने वचन-पत्र में किसानों को थ्री फेस की बिजली प्रतिदिन 12 घंटे देने की बात कही थी। लेकिन आज ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को खेती के लिए बिजली नहीं मिल रही है।
– बाढ़ और भारी वर्षा से पीड़ित किसानों को पांच महीने बाद भी मुआवजा मिलना तो दूर सर्वे तक नहीं कराया गया। दुख की बात तो यह है हाल ही में कुछ जिलों में ओला वृष्टि से पुनः फसलों का नुकसान हो गया है।
– मुख्यमंत्री कमलनाथ गौवंश के संवर्धन और संरक्षण को लेकर प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौशाला खोलने का वचन देते हैं लेकिन 10 माह में एक भी ग्राम पंचायत में गौशाला नहीं खुली।
– केंद्र सरकार ने लघु और सीमांत किसानों को किसान सम्मान निधि के माध्यम से 6 हजार रूपए सालाना देने की योजना लागू कि लेकिन मध्यप्रदेश सरकार योजना के पात्र किसानों की सूची केंद्र सरकार को न सौंपकर किसानों का अहित कर रही है।
– सीएम हेल्पलाइन पर किसानों की 3 हजार से अधिक शिकायतें पेंडिंग है। इन शिकायतों में कर्जमाफी का लाभ न मिलना, बाढ पीड़ितों का राहत राशि नही मिलना, खाद बीज और जमीन सम्बन्धी शिकायते है।
– सर्वे के नाम पर किसानों के हाथों में कैदियों की तरह स्लेट पकडा कर उनकी तस्वीर खिंचवाई गई। फर्क इतना था कि इस स्लेट पर अपराध की जगह किसान का नाम, फसल का नाम, खसरा नंबर और जमीन के बारे में लिखा गया है।
– रोजगार और 4 हजार रुपये बेरोजगारी भत्ते के नाम पर प्रदेश के युवाओं के साथ मजाक। सरकार साल भर में एक युवा का नाम नहीं बता सकती, जिसे यह भत्ता मिला हो।
– चुनाव प्रचार में 100 रूपए प्रतिमाह बिजली देने का झूठा प्रचार कर गरीबो को थमा रहें हजारों के बिल। गरीब आदमी अपने हजारों के बिजली के बिल लेकर दर-दर की ठोकरें खा रहा है।
– हर पंचायत में गौशाला खोलने की वादाखिलाफी। 12 महीने की सरकार ने गौशालाएं बनाना तो दूर किसी गौशाला की नींव तक नहीं खोदी। परिणाम आज भी भीषण ठंड में गायें ठिठुर ठिठुर कर दम तोड़ रही है।
– सामाजिक और आर्थिक न्याय के झूठे प्रचार किए गए। वृद्धावस्था पेंशन की राशि 1 हजार रूपए तक बढाने का वचन दिया लेकिन नहीं बढाई।
– मुख्यमंत्री कन्यादान योजना की राशि से 51 हजार तो कर दी लेकिन किसी बेटी को वह प्रदान नहीं की गयी।
– मुख्यमंत्री मेधावी छात्र योजना के बच्चों को मिलने वाली लेपटॉप की योजना बन्द की।
– छात्राओं को स्कूटी देने का झूठा वादा कर उनको मिलने वाली साईकिल भी छीनी।
– पुलिस बल को साप्ताहिक अवकाश देने का झूठा प्रचार।
– गरीब परिवारों को प्रतिमाह 4 किलो दाल देने का वादा झूठा निकला।
– मध्यप्रदेश में नई शराब नीति को लागू कर प्रदेश को नशे के व्यापार में झोंक दिया।
– प्रदेश में भावांतर योजना बंद से लाखों किसान परेशान।
– केन्द्र की भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गयी योजनाओं को बाधित कर रही प्रदेश सरकार।
– उदाहरण के लिए केन्द्र सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत आठ लाख आवास स्वीकृत किए, लेकिन गरीब विरोधी कमलनाथ सरकार ने उसमें से 2 लाख आवास लौटा दिए।
– बेहतर सडकें बनाने के बजाए प्रदेश की 4 हजार कि.मी. सडकों को 9 माह में जर्जर अवस्था में पहुंचाया।
– प्रदेश में अपराधों का लगातार ग्राफ बढा।
– सरकारी आकड़ों के अनुसार मात्र 9 माह में 1 हजार 278 हत्याएं और 39 हजार 485 महिलाओं पर अत्याचार के मामले दर्ज।
– इन अपराधों में चित्रकूट के मासूमों और उसी प्रकृति के अन्य अपराधों के मामले भी शामिल है।
– नाबालिकों के साथ अपहरण और दुष्कर्म की घटनाओं में मध्यप्रदेश बना अव्वल।
– कांग्रेस ने पेट्रोल डीजल के दाम कम करने की बात कही थी, लेकिन उस पर वेट 5 प्रतिशत तक बढ़ा दिया।
– साल भर के भीतर मध्यप्रदेश में जैसी राजनैतिक अराजकता देखी गयी है, वैसी इतिहास में कभी नहीं देखी गयी।
– विधायक, मंत्रियों पर आरोप लगा रहे हैं और मंत्री भरी बैठक में मुख्यमंत्री को हड़का रहे है।
– शासन व्यवस्था को निर्देश देने का काम एक नहीं तीन-तीन मुख्यमंत्री करते है, जिससे प्रशासन में उहापोह की स्थिति बनी हुई है।
– पूरे प्रदेश में नदियों के बीचों बीच सड़क बना बनाकर भारी पैमाने पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। खबरें तो यहां तक है कि प्रशासनिक अधिकारी मुख्यमंत्री से कह रहे हैं कि वे अवैध खनन के विरूद्ध कार्यवाही नहीं कर सकते क्योंकि मंत्रियों और विधायकों के फोन आते है।
– शराब माफिया को लेकर भी किस किस प्रकार की जानकारियां के ऑडियों पिछले दिनों में बाहर आए है, सबको पता है।
– तबादला उद्योग ने पूरे सिस्टम की कमर तोड़कर रख दी है। कहीं कोई अधिकारी, कर्मचारी सुरक्षित माहौल में काम नहीं कर पा रहा।
– सरकार ने अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए नए नए प्रपंच रचने का काम साल भर के भीतर खूब किया है।
– जनता एक विषय को भूलकर दूसरे विषय की चर्चा करने लगे, इसी जुगाड में सरकार का पूरा समय बीता है।
– आजकल माफिया मुक्त मध्यप्रदेश के लोक लुभावन जुमले की आड़ में जिस प्रकार से लोगों के कागज देखे बिना चिन्हित स्थानों पर कार्यवाही की जा रही है, उससे भी सरकार की नियत पर सवाल खड़े होते है।
– एक ओर तमाम रसूखदार कांग्रेसी नेता सरकारी जमीनों पर कब्जे करने में जुट गए है, वहीं दूसरी ओर नियम कायदे से भवन बनानें वालों को भी प्रताडित किया जा रहा है।
– भारतीय जनता पार्टी माफिया के विरूद्ध कार्यवाही के विरोध में नहीं है। लेकिन इसके नाम पर भेदभाव का विरोध करते है।

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